Skip to main content

Khanna Hospital

पित्त की पथरी का इलाज और जरूरी जानकारी

पित्त की पथरी का इलाज और जरूरी जानकारी

    गॉलब्लैडर, यानी पित्ताशय, लीवर के ठीक नीचे टिकी एक छोटी थैली होती है। इसका काम है लीवर द्वारा बनाए गए पित्त को जमा करके रखना, ताकि जब भी शरीर को वसा पचानी हो, यह उसे भेज सके। अब दिक्कत तब शुरू होती है जब इसी पित्त में मौजूद पदार्थों का अनुपात बिगड़ जाए — धीरे-धीरे उसमें ठोस कण जमने लगते – हैं, और यही आगे चलकर पथरी का रूप ले लेते हैं। इसे ही हम गॉलब्लैडर स्टोन कहते हैं।

    Ask Your Query

      मजे की बात यह है कि बहुत से लोगों को सालों तक पता ही नहीं चलता कि उनके गॉलब्लैडर में पथरी है — कोई लक्षण ही नहीं दिखते। दूसरी तरफ कुछ लोगों में यही पथरी पित्त की नली में फंसकर तेज दर्द, उल्टी, बुखार या पीलिया तक करा देती है। तो इलाज का पूरा दारोमदार पथरी के साइज पर नहीं, बल्कि इस बात पर टिका है कि वह परेशानी दे रही है या चुपचाप बैठी है।

      गॉलब्लैडर करता क्या है

      नाशपाती जैसे आकार का यह छोटा-सा अंग लीवर से सटा रहता है। खाना खाने के बाद, खासकर अगर उसमें चिकनाई ज्यादा हो, तो गॉलब्लैडर अपने अंदर जमा पित्त छोटी आंत में छोड़ देता है। कोलेस्ट्रॉल या दूसरे तत्व अगर पित्त में जरूरत से ज्यादा जमा होने लगें, तो वहीं से क्रिस्टल बनना शुरू होता है और आगे चलकर पथरी।

      दो तरह की होती है यह पथरी

      एक तो कोलेस्ट्रॉल स्टोन — सबसे ज्यादा देखी जाने वाली किस्म, जिसमें कोलेस्ट्रॉल ही मुख्य घटक होता है। पित्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाए या गॉलब्लैडर ठीक से खाली न हो पाए, तो यही बनती है।

      दूसरी है पिगमेंट स्टोन, जिसमें बिलीरुबिन से जुड़े पदार्थ ज्यादा होते हैं। यह उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जिन्हें कुछ खास रक्त-संबंधी या लीवर की स्थितियां हों।

      आखिर होती क्यों है

      सच कहें तो कोई एक वजह नहीं बताई जा सकती — कई चीजें मिलकर जोखिम बढ़ाती हैं। मोटापा या ज्यादा वजन इसमें सबसे ऊपर आता है। इसके अलावा बहुत तेजी से वजन घट जाना, लंबे समय तक बेहद कम कैलोरी पर रहना, खाने में असंतुलन, महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था, बढ़ती उम्र, परिवार में पहले किसी को पथरी रही हो, या कुछ खास बीमारियां और दवाएं भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं। लेकिन यह भी सच है कि इनमें से कुछ भी लागू न होने के बावजूद किसी को पथरी हो सकती है — शरीर हमेशा किताबी नियमों से नहीं चलता।

      लक्षण कैसे पहचानें

      बहुत बार पथरी “साइलेंट” होती है — बस पड़ी रहती है, कोई हलचल नहीं। ऐसे में अक्सर किसी और वजह से कराए गए अल्ट्रासाउंड में अचानक इसका पता चल जाता है। लेकिन जब यह मुश्किल खड़ी करने लगे तो पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द, कभी-कभी बीच पेट में अचानक उठने वाली तकलीफ, दर्द का पीठ या दाहिने कंधे तक फैल जाना, भारी खाने के बाद तकलीफ, जी मिचलाना, उल्टी, पेट फूलना या अपच — ये सब सामने आ सकते हैं। दर्द कभी कुछ मिनट में उतर जाता है, तो कभी घंटों तक बना रहता है। अगर यह बार-बार हो या रुके ही नहीं, तो जांच करा लेना ही बेहतर है।

      कुछ संकेत हल्के में लेने वाले नहीं होते — तेज या लगातार पेट दर्द, बुखार-ठंड लगना, उल्टियां रुक ही न पाना, आंखों या त्वचा का पीला पड़ना, पेशाब का गहरा रंग, मल का असामान्य रूप से हल्का होना, या शरीर में अजीब सी कमजोरी। इनमें से कुछ भी दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए, टालना नहीं।

      जांच का तरीका

      डॉक्टर पहले लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं। इसके बाद पेट का अल्ट्रासाउंड सबसे पहला और सबसे भरोसेमंद टेस्ट माना जाता है, जिससे पथरी और उससे जुड़ी दूसरी दिक्कतें साफ दिख जाती हैं। अगर इंफेक्शन, सूजन या नली में रुकावट का शक हो तो ब्लड टेस्ट भी कराया जाता है, और कुछ मामलों में CT scan, MRI या खास बाइल-डक्ट इमेजिंग की जरूरत पड़ सकती है। किस टेस्ट की जरूरत है, यह मरीज के लक्षण देखकर ही तय होता है।

      अब इलाज की बात

      यहां एक जैसा फॉर्मूला किसी पर लागू नहीं होता।

      अगर पथरी है लेकिन कोई लक्षण नहीं — तो घबराने की बात नहीं। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर बस निगरानी की सलाह देते हैं, उम्र, सेहत और आगे के जोखिम को देखते हुए। यानी सिर्फ रिपोर्ट में “गॉलब्लैडर स्टोन” लिखा आ जाना, ऑपरेशन की टिकट नहीं है।

      जब पथरी असल में परेशान करने लगे, तब गॉलब्लैडर स्टोन रिमूवल सर्जरी, यानी लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी — छोटे-छोटे चीरे लगाकर कैमरे की मदद से गॉलब्लैडर निकालना — सबसे आम रास्ता है।

      कुछ चुनिंदा मामलों में, खासकर कोलेस्ट्रॉल स्टोन में, दवाओं से पथरी को धीरे-धीरे घोलने की कोशिश की जाती है — पर यह हर किसी पर काम नहीं करती, समय भी लगता है, और बाद में पथरी दोबारा बनने का खतरा भी रहता है। इसलिए खुद से कोई दवा शुरू न करें।

      जब पथरी असल में परेशान करने लगे, तब लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी — यानी छोटे-छोटे चीरे लगाकर कैमरे की मदद से गॉलब्लैडर निकालना — सबसे आम रास्ता है। इसके बाद भी जिंदगी लगभग पहले जैसी ही चलती रहती है, क्योंकि पित्त बनना लीवर का काम है, गॉलब्लैडर का नहीं।

      कुछ खास परिस्थितियों में, जहां लैप्रोस्कोपिक तरीका मुफीद नहीं बैठता, वहां ओपन सर्जरी का विकल्प चुना जाता है — यह फैसला सर्जन मौके पर मरीज की हालत देखकर लेते हैं।

      और अगर पथरी गॉलब्लैडर से निकलकर कॉमन बाइल डक्ट तक पहुंच जाए, तो ERCP जैसी एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से उसे वहां से निकाला जाता है, उसके बाद बाकी इलाज की योजना बनती है।

      तो क्या ऑपरेशन हर बार जरूरी है?

      नहीं। बिना लक्षण वाली पथरी में अक्सर सिर्फ नजर रखी जाती है। लेकिन बार-बार दर्द, सूजन, नली में पथरी फंसना या कोई जटिलता — इनमें से कुछ भी हो तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। यह फैसला सिर्फ पथरी का साइज देखकर नहीं लिया जाता, पूरी तस्वीर देखी जाती है।

      ऑपरेशन कितना सुरक्षित है

      लैप्रोस्कोपिक सर्जरी अब एक आम और अच्छी तरह आजमाई हुई प्रक्रिया है, कई मरीजों में सफलतापूर्वक की जा चुकी है। फिर भी, जैसे हर सर्जरी में कुछ जोखिम होता है, वैसे ही यहां भी है — सर्जन मरीज की उम्र, सेहत और बाकी हालात देखकर इस बारे में पूरी जानकारी देते हैं।

      गॉलब्लैडर निकलने के बाद जिंदगी कैसी रहती है

      सामान्य ही रहती है, ज्यादातर लोगों के लिए। पित्त बनाना लीवर का काम है, गॉलब्लैडर तो बस उसे स्टोर करता था — वह हट भी जाए तो लीवर अपना काम करता रहता है। बस शुरुआत में कुछ लोगों को तला-भुना या बहुत चिकनाई वाला खाना खाने पर हल्की गड़बड़ महसूस हो सकती है। धीरे-धीरे, डॉक्टर की सलाह से सामान्य खाने पर लौटा जा सकता है।

      खाने-पीने में क्या रखें ध्यान

      हर किसी का शरीर अलग तरह से रिएक्ट करता है — अगर कोई चीज खाने के बाद तकलीफ बढ़े, तो उसे कुछ समय के लिए हटा देना समझदारी है। बाकी, संतुलित खाना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है: ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, फाइबर वाली चीजें, पर्याप्त पानी, और सीमित मात्रा में हेल्दी फैट।

      दूसरी तरफ, बहुत ज्यादा तला-भुना, चिकनाई से भरपूर खाना, ज्यादा घी-मक्खन, बार-बार फास्ट फूड और प्रोसेस्ड चीजें — इन्हें कम करना ही बेहतर रहता है। और हां, कोई भी बड़ा डाइट बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से बात कर लें।

      तेल पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं — शरीर को थोड़ी वसा चाहिए ही होती है। बस ज्यादा चिकनाई वाला और तला हुआ खाना कुछ लोगों में दर्द बढ़ा सकता है, इसलिए संतुलन और अपने ट्रिगर फूड की पहचान ज्यादा काम की चीज है।

      नींबू पानी से पथरी घुल जाएगी या निकल जाएगी — ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिलता। इंटरनेट पर चलने वाले “गॉलब्लैडर फ्लश” जैसे दावों पर भरोसा करके इलाज में देरी न करें। और सिर्फ एक्सरसाइज से भी पहले से बनी पथरी गायब नहीं होती — हां, वजन नियंत्रित रखने और सेहतमंद रहने में यह जरूर मदद करती है, बस वजन घटाना हो तो धीरे-धीरे और सही तरीके से।

      बचाव के लिए क्या करें

      पूरी तरह रोक पाना शायद हर मामले में मुमकिन न हो, पर कुछ आदतें जोखिम जरूर घटा सकती हैं — वजन संतुलित रखना, अचानक तेजी से वजन न घटाना, संतुलित खाना, फाइबर को डाइट में जगह देना, नियमित हलचल बनाए रखना, और प्रोसेस्ड-चिकनाई वाले खाने पर लगाम। वजन घटाने की कोई योजना बनानी हो तो डॉक्टर या डाइटिशियन की मदद ले लें, अकेले तेजी से घटाना उल्टा नुकसान कर सकता है।

      बात यहां आकर टिकती है

      गॉलब्लैडर स्टोन आम समस्या जरूर है, पर इलाज हर किसी के लिए अलग शक्ल लेता है। बिना लक्षण की पथरी में अक्सर सिर्फ निगरानी काफी होती है; बार-बार दर्द, सूजन या नली में फंसी पथरी जैसे मामलों में सक्रिय इलाज — कई बार सर्जरी तक — जरूरी हो जाता है। पेट दर्द, बुखार, उल्टी या पीलिया जैसे लक्षण दिखें तो टालें नहीं, जांच के बाद ही डॉक्टर बता पाएंगे कि निगरानी ठीक है, दवा चलेगी, या सर्जरी का वक्त आ गया है।

      अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

      Q1. गॉलब्लैडर स्टोन असल में है क्या? 

      A1. पित्ताशय के अंदर बनने वाले ठोस कण, जिनमें ज्यादातर कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन जैसे पदार्थ होते हैं।

      Q2. क्या इसमें दर्द होना तय है? 

      A2. बिल्कुल नहीं, बहुत से मामलों में कोई लक्षण ही नहीं होते, पता तब चलता है जब किसी और वजह से जांच हो जाए। दर्द तभी आता है जब पथरी पित्त के रास्ते में अड़चन बने।

      Q3. सबसे पहचाना जाने वाला लक्षण कौन-सा है? 

      A3. पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द — खाने के बाद अक्सर बढ़ जाता है, और कई बार पीठ या कंधे तक भी पहुंच जाता है।

      Q4. दवा से ठीक हो सकती है? 

      A4. कुछ खास मामलों में कोशिश की जाती है, पर यह हर पथरी या हर मरीज के लिए काम नहीं करता।

      Q5. घरेलू नुस्खों से पथरी निकल जाती है? 

      A5. इसका कोई भरोसेमंद प्रमाण नहीं मिलता। लक्षण हों तो घरेलू उपायों के भरोसे इलाज मत टालिए।

      Dr-Manish-Kumar-Gupta

      Dr. Vivek Khanna

      Khanna Hospital Established in 2009 by Dr S. C. Khanna and Dr. Vivek Khanna, a distinguished laparoscopic surgeons with over twenty-three years of clinical experience, Khanna Hospital was founded with a clear vision to deliver ethical, advanced, and compassionate healthcare to the community.

      Ask Your Query