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नॉर्मल डिलीवरी के लिए क्या करना चाहिए? आसान भाषा में जानें जरूरी टिप्स और सावधानियां

नॉर्मल डिलीवरी के लिए क्या करना चाहिए? आसान भाषा में जानें जरूरी टिप्स और सावधानियां

    गर्भावस्था के दौरान हर महिला चाहती है कि उसकी डिलीवरी सुरक्षित हो और बच्चा स्वस्थ पैदा हो। कई गर्भवती महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य यह जानना चाहते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी के लिए क्या करना चाहिए, कौन-सी एक्सरसाइज करनी चाहिए, क्या खाना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

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      नॉर्मल डिलीवरी, जिसे मेडिकल भाषा में वेजाइनल डिलीवरी (Vaginal Delivery) कहा जाता है, में बच्चा योनि के रास्ते जन्म लेता है। सही खानपान, नियमित प्रसवपूर्व जांच, शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह गर्भावस्था को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

      हालांकि, यह समझना जरूरी है कि नॉर्मल डिलीवरी की कोई गारंटी नहीं होती। डिलीवरी का तरीका मां और बच्चे की सेहत, गर्भावस्था की स्थिति और प्रसव के दौरान होने वाली परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात है मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा।

      1. नॉर्मल डिलीवरी के लिए क्या करना चाहिए?

      नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बेहतर बनाने और गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने के लिए कुछ जरूरी आदतों को अपनाया जा सकता है।

      1. नियमित रूप से गायनेकोलॉजिस्ट से जांच करवाएं

      गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच करवाना सबसे जरूरी कदमों में से एक है। डॉक्टर मां के ब्लड प्रेशर, वजन, हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर और बच्चे की वृद्धि की निगरानी करते हैं।

      अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचों की मदद से बच्चे की स्थिति, प्लेसेंटा और गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।

      नियमित जांच से गर्भावस्था में होने वाली संभावित परेशानियों की समय पर पहचान और उचित इलाज में मदद मिलती है।

      2. संतुलित और पौष्टिक आहार लें

      गर्भावस्था में मां के शरीर को बच्चे की वृद्धि और अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है। संतुलित आहार गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और प्रसव के लिए तैयार होने में मदद करता है।

      अपने आहार में निम्नलिखित खाद्य पदार्थ शामिल करें:

      • हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी और अन्य हरी सब्जियां फोलेट और दूसरे जरूरी पोषक तत्व प्रदान करती हैं।
      • प्रोटीन युक्त भोजन: दालें, चना, राजमा, अच्छी तरह पके अंडे, पनीर और अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत।
      • फल: सेब, संतरा, अमरूद, केला और मौसमी फल।
      • दूध और डेयरी उत्पाद: पाश्चुरीकृत दूध, दही और पनीर कैल्शियम के अच्छे स्रोत हो सकते हैं।
      • साबुत अनाज: दलिया, ओट्स, गेहूं और अन्य साबुत अनाज ऊर्जा और फाइबर प्रदान करते हैं।
      • आयरन युक्त खाद्य पदार्थ: दालें, हरी सब्जियां और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आयरन सप्लीमेंट।

      इसके अलावा, पर्याप्त पानी पिएं और भोजन में विविधता बनाए रखें। गर्भावस्था में आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम या अन्य सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।

      ध्यान रखें कि किसी खास फल, सब्जी या घरेलू नुस्खे से नॉर्मल डिलीवरी सुनिश्चित नहीं होती।

      3. डॉक्टर की अनुमति से नियमित व्यायाम करें

      यदि आपकी गर्भावस्था सामान्य है और डॉक्टर ने व्यायाम करने की अनुमति दी है, तो हल्की शारीरिक गतिविधि फायदेमंद हो सकती है।

      आप निम्नलिखित गतिविधियां कर सकती हैं:

      • हल्की वॉक: अपनी क्षमता के अनुसार नियमित रूप से टहलें। शुरुआत कम समय से करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
      • प्रेग्नेंसी योग: प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में गर्भावस्था के अनुकूल योग करें।
      • पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज: सही तरीके से की गई पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।
      • हल्की स्ट्रेचिंग: शरीर की सहजता और डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की स्ट्रेचिंग करें।

      गर्भावस्था में व्यायाम करने का उद्देश्य शरीर को स्वस्थ और सक्रिय रखना है, न कि जबरदस्ती नॉर्मल डिलीवरी करवाना।

      यदि ब्लीडिंग, चक्कर, सीने में दर्द, सांस लेने में असामान्य परेशानी या दर्दनाक संकुचन हों, तो व्यायाम रोककर तुरंत चिकित्सा सलाह लें। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में व्यायाम की उपयुक्तता डॉक्टर से तय करवाएं।

      4. पर्याप्त नींद और आराम करें

      गर्भावस्था में शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिसके कारण थकान और नींद की समस्या हो सकती है। पर्याप्त नींद और आराम से शरीर को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।

      कुछ आसान उपाय अपनाएं:

      • रोजाना नियमित समय पर सोने की कोशिश करें।
      • सोने से पहले शांत वातावरण बनाएं।
      • जरूरत के अनुसार दिन में थोड़ी देर आराम करें।
      • गर्भावस्था के आगे के महीनों में करवट लेकर सोना आरामदायक हो सकता है। विशेष रूप से 28 सप्ताह के बाद सोने के लिए करवट की स्थिति अपनाने की सलाह दी जाती है।

      यदि आपको लगातार नींद नहीं आती, सांस लेने में परेशानी होती है या बहुत अधिक थकान रहती है, तो अपने डॉक्टर से बात करें।

      5. शरीर का वजन नियंत्रित रखें

      गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना सामान्य है और बच्चे की वृद्धि के लिए जरूरी भी है। हालांकि, जरूरत से अधिक या बहुत कम वजन बढ़ना कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।

      स्वस्थ वजन बढ़ने की मात्रा गर्भावस्था से पहले के BMI, एक बच्चे या जुड़वां गर्भावस्था और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर करती है।

      इसके लिए संतुलित भोजन लें, डॉक्टर की सलाह के अनुसार शारीरिक गतिविधि करें और नियमित जांच करवाएं। वजन कम करने के लिए गर्भावस्था में क्रैश डाइट या लंबे समय तक भूखे रहने से बचें।

      6. तनाव कम करने की कोशिश करें

      गर्भावस्था में डिलीवरी को लेकर चिंता होना सामान्य है। कुछ महिलाओं को प्रसव पीड़ा, ऑपरेशन या बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर डर लग सकता है।

      तनाव कम करने के लिए आप:

      • हल्की सांस लेने की एक्सरसाइज कर सकती हैं।
      • डॉक्टर से डिलीवरी से जुड़ी शंकाओं पर खुलकर बात कर सकती हैं।
      • परिवार और अपने साथी से भावनात्मक सहयोग ले सकती हैं।
      • प्रसव की तैयारी से जुड़ी कक्षाओं में भाग ले सकती हैं।

      यदि चिंता बहुत अधिक हो रही है या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो डॉक्टर से मदद लें।

      2. नॉर्मल डिलीवरी के लिए क्या खाना चाहिए?

      नॉर्मल डिलीवरी के लिए कोई विशेष भोजन जरूरी नहीं है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार मां और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

      यहां एक सामान्य उदाहरण दिया गया है:

      समय क्या खा सकती हैं
      सुबह उठने पर पानी और हल्का नाश्ता, यदि जरूरत हो
      नाश्ता दलिया, ओट्स, अच्छी तरह पका अंडा या पौष्टिक विकल्प
      बीच में कोई ताजा फल और थोड़े मेवे, यदि उपयुक्त हों
      दोपहर का भोजन रोटी, दाल, सब्जी, दही और सलाद को अच्छी तरह धोकर
      शाम का नाश्ता भुना चना, दूध या अन्य पौष्टिक विकल्प
      रात का भोजन रोटी या चावल, दाल और सब्जी
      सोने से पहले दूध, यदि आपको पसंद हो और पचता हो

      यह केवल एक सामान्य उदाहरण है। आपकी पोषण संबंधी जरूरतें, डायबिटीज, एनीमिया, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार आहार में बदलाव हो सकता है।

      खाने-पीने से जुड़ी जरूरी सावधानियां:

      • कच्चे या अधपके अंडे, मांस और मछली से बचें।
      • बिना पाश्चुरीकरण वाले दूध और उससे बने उत्पादों से बचें।
      • फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोएं।
      • शराब से पूरी तरह बचें।
      • कैफीन का सेवन सीमित रखें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।

      3. क्या नॉर्मल डिलीवरी के लिए स्क्वाट्स करना जरूरी है?

      स्क्वाट्स गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं के लिए उपयोगी व्यायाम हो सकते हैं, लेकिन हर गर्भवती महिला के लिए जरूरी या सुरक्षित नहीं होते।

      यदि आपकी गर्भावस्था सामान्य है, तो डॉक्टर या गर्भावस्था के व्यायाम में प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त स्क्वाट्स किए जा सकते हैं।

      इन बातों का ध्यान रखें:

      • शुरुआत में गहरे स्क्वाट्स या भारी वजन उठाने से बचें।
      • संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर सहारा लें।
      • दर्द, चक्कर या असामान्य परेशानी होने पर तुरंत रुकें।
      • यदि डॉक्टर ने शारीरिक गतिविधि सीमित करने को कहा है, तो स्क्वाट्स न करें।

      स्क्वाट्स करने से बच्चा निश्चित रूप से नीचे आ जाएगा या नॉर्मल डिलीवरी हो जाएगी, ऐसा मानने का पर्याप्त वैज्ञानिक आधार नहीं है।

      4. नॉर्मल डिलीवरी के लिए कब से तैयारी करनी चाहिए?

      नॉर्मल डिलीवरी की तैयारी गर्भावस्था की शुरुआत से ही स्वस्थ आदतों और नियमित मेडिकल देखभाल के साथ शुरू की जा सकती है।

      पहली तिमाही: 1 से 12 सप्ताह

      इस दौरान बच्चे के शुरुआती विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

      • समय पर गर्भावस्था की जांच करवाएं।
      • डॉक्टर की सलाह से फोलिक एसिड लें।
      • संतुलित भोजन करें और शराब, तंबाकू तथा धूम्रपान से बचें।
      • बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं या हर्बल उत्पाद न लें।

      दूसरी तिमाही: 13 से 27 सप्ताह

      इस समय बच्चे की वृद्धि और मां के स्वास्थ्य की निगरानी महत्वपूर्ण होती है।

      • नियमित जांच और निर्धारित अल्ट्रासाउंड करवाएं।
      • डॉक्टर की अनुमति से हल्की वॉक या अन्य सुरक्षित गतिविधियां करें।
      • आयरन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत पर डॉक्टर से चर्चा करें।
      • पीठ दर्द और अन्य सामान्य परेशानियों के लिए सुरक्षित उपाय जानें।

      तीसरी तिमाही: 28 सप्ताह से प्रसव तक

      इस दौरान प्रसव की योजना और बच्चे की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

      • नियमित जांच करवाएं।
      • डॉक्टर से बच्चे की स्थिति और डिलीवरी के विकल्पों पर चर्चा करें।
      • अस्पताल जाने की योजना बनाएं।
      • प्रसव के शुरुआती संकेतों को समझें।
      • अस्पताल का बैग और जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।

      याद रखें कि प्रसव कब शुरू होगा, यह हर महिला में अलग हो सकता है। केवल किसी खास सप्ताह में की गई एक्सरसाइज से प्रसव जल्दी शुरू करने की कोशिश न करें।

      5. क्या 9वें महीने में नॉर्मल डिलीवरी के लिए कुछ खास करना चाहिए?

      गर्भावस्था के 9वें महीने में महिलाएं अक्सर जानना चाहती हैं कि प्रसव को आसान बनाने के लिए क्या किया जा सकता है।

      यदि आपकी गर्भावस्था सामान्य है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की वॉक, पर्याप्त आराम, संतुलित आहार और नियमित जांच जारी रख सकती हैं।

      इस समय इन बातों का ध्यान रखें:

      • बच्चे की हलचल पर ध्यान दें और उसमें कमी महसूस होने पर तुरंत अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें।
      • प्रसव के संकेतों को पहचानें।
      • डॉक्टर से अस्पताल पहुंचने का सही समय जानें।
      • अपनी मर्जी से प्रसव शुरू करने के लिए दवाएं, कैस्टर ऑयल या घरेलू नुस्खे न अपनाएं।
      • बिना चिकित्सकीय सलाह के निप्पल स्टिमुलेशन या अन्य तरीकों से प्रसव शुरू करने की कोशिश न करें।

      यदि गर्भावस्था 41 सप्ताह तक पहुंचती है या कोई मेडिकल समस्या सामने आती है, तो डॉक्टर प्रसव शुरू करवाने यानी इंडक्शन की सलाह दे सकते हैं। यह निर्णय मां और बच्चे की स्थिति के अनुसार लिया जाता है।

      6. नॉर्मल डिलीवरी होने की संभावना किन बातों पर निर्भर करती है?

      नॉर्मल डिलीवरी केवल खानपान, व्यायाम या महिला की इच्छा पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए कई चिकित्सकीय कारक महत्वपूर्ण होते हैं।

      कुछ प्रमुख कारक हैं:

      1. बच्चे की स्थिति: सिर नीचे की ओर होने पर वेजाइनल डिलीवरी संभव हो सकती है। ब्रीच स्थिति में विशेष मूल्यांकन की जरूरत होती है।
      2. मां का स्वास्थ्य: हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और अन्य बीमारियां डिलीवरी की योजना को प्रभावित कर सकती हैं।
      3. प्लेसेंटा की स्थिति: यदि प्लेसेंटा गर्भाशय के मुंह को ढक रहा है, तो सामान्य प्रसव सुरक्षित नहीं हो सकता।
      4. बच्चे का स्वास्थ्य: प्रसव के दौरान बच्चे की धड़कन और स्वास्थ्य की निगरानी जरूरी होती है।
      5. प्रसव की प्रगति: गर्भाशय का मुंह खुलने और बच्चे के नीचे आने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
      6. पहले की डिलीवरी या सर्जरी का इतिहास: पिछली सिजेरियन डिलीवरी या गर्भाशय की कुछ सर्जरी के बाद डिलीवरी का तरीका व्यक्तिगत मूल्यांकन के आधार पर तय किया जाता है।

      यदि डॉक्टर को लगता है कि वेजाइनल डिलीवरी से मां या बच्चे को गंभीर जोखिम हो सकता है, तो सिजेरियन डिलीवरी सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकती है। ऐसे में सिजेरियन को असफलता नहीं समझना चाहिए।

      7. नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी में क्या अंतर है?

      नॉर्मल डिलीवरी सिजेरियन डिलीवरी
      बच्चा योनि के रास्ते जन्म लेता है। ऑपरेशन के जरिए पेट और गर्भाशय में चीरा लगाकर बच्चा पैदा किया जाता है।
      सामान्यतः पेट की सर्जरी की जरूरत नहीं होती। यह एक बड़ी सर्जरी है।
      रिकवरी अक्सर जल्दी हो सकती है। रिकवरी में सामान्यतः अधिक समय लग सकता है।
      प्रसव पीड़ा और वेजाइनल टियर हो सकते हैं। सर्जरी से संबंधित संक्रमण, रक्तस्राव और अन्य जोखिम हो सकते हैं।
      प्रसव के दौरान स्थिति बदलने पर सिजेरियन की जरूरत पड़ सकती है। कुछ परिस्थितियों में यह मां और बच्चे के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प होता है।

      दोनों तरीकों के अपने फायदे और जोखिम हैं। सही विकल्प वही है जो उस समय मां और बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित हो।

      8. प्रसव के कौन-से संकेत दिखने पर अस्पताल जाना चाहिए?

      प्रसव शुरू होने के कुछ सामान्य संकेत हैं:

      • नियमित अंतराल पर आने वाले संकुचन, जो धीरे-धीरे अधिक तेज और नियमित होते जाएं।
      • पानी की थैली फटना या योनि से पानी जैसा तरल निकलना।
      • हल्का खूनी म्यूकस डिस्चार्ज, जिसे शो कहा जाता है।
      • कमर या पेट के निचले हिस्से में नियमित दर्द।

      इन संकेतों में से कोई भी दिखाई देने पर अपनी गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें और अस्पताल जाने के निर्देशों का पालन करें।

      निम्नलिखित लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लें:

      • योनि से अधिक मात्रा में रक्तस्राव।
      • बच्चे की हलचल में स्पष्ट कमी या हलचल महसूस न होना।
      • तेज और लगातार पेट दर्द।
      • 37 सप्ताह से पहले प्रसव जैसे संकुचन या पानी निकलना।
      • तेज सिरदर्द, धुंधला दिखना या सांस लेने में गंभीर परेशानी।

      इन स्थितियों में घर पर इंतजार करना या घरेलू उपचार अपनाना सुरक्षित नहीं है।

      9. नॉर्मल डिलीवरी को लेकर महिलाओं के कुछ सामान्य सवाल

      सवाल 1: क्या रोजाना चलने से नॉर्मल डिलीवरी होती है?

      हल्की वॉक गर्भावस्था के दौरान शारीरिक स्वास्थ्य और फिटनेस बनाए रखने में मदद कर सकती है। लेकिन इससे नॉर्मल डिलीवरी की गारंटी नहीं मिलती। व्यायाम की मात्रा आपकी गर्भावस्था और स्वास्थ्य के अनुसार होनी चाहिए।

      सवाल 2: क्या नॉर्मल डिलीवरी के लिए 9वें महीने में ज्यादा चलना चाहिए?

      नहीं। ज्यादा चलना या थकने तक व्यायाम करना जरूरी नहीं है। डॉक्टर की अनुमति के अनुसार आरामदायक गति से चलें और शरीर के संकेतों पर ध्यान दें।

      सवाल 3: क्या अनानास या खजूर खाने से नॉर्मल डिलीवरी होती है?

      किसी एक खाद्य पदार्थ से नॉर्मल डिलीवरी सुनिश्चित नहीं होती। खजूर सामान्य मात्रा में संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन गर्भावस्था में डायबिटीज होने पर इसकी मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अनानास को प्रसव शुरू करने का प्रमाणित तरीका नहीं माना जाता।

      सवाल 4: क्या पहली डिलीवरी नॉर्मल हो सकती है?

      हां, पहली गर्भावस्था में भी नॉर्मल डिलीवरी संभव है। इसका निर्णय बच्चे की स्थिति, मां के स्वास्थ्य और प्रसव की प्रगति सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।

      सवाल 5: क्या नॉर्मल डिलीवरी के लिए गर्भाशय का मुंह खुलना जरूरी है?

      हां। वेजाइनल डिलीवरी के दौरान गर्भाशय का मुंह धीरे-धीरे खुलता है, ताकि बच्चा जन्म नली से बाहर आ सके। इस प्रक्रिया को सर्वाइकल डाइलेशन कहा जाता है। इसकी गति हर महिला में अलग हो सकती है।

      सवाल 6: क्या नॉर्मल डिलीवरी में दर्द नहीं होता?

      प्रसव के दौरान दर्द और संकुचन सामान्य हैं, लेकिन उनका अनुभव हर महिला में अलग होता है। सांस लेने की तकनीक, भावनात्मक सहयोग और डॉक्टर की सलाह से उपलब्ध दर्द कम करने के विकल्प मददगार हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर एपिड्यूरल जैसे विकल्पों पर भी चर्चा की जा सकती है।

      सवाल 7: क्या पहले सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है?

      कुछ महिलाओं में पिछली सिजेरियन डिलीवरी के बाद वेजाइनल बर्थ संभव होती है, जिसे VBAC कहा जाता है। हालांकि, इसकी सुरक्षा पिछली सर्जरी के प्रकार, वर्तमान गर्भावस्था और अस्पताल में उपलब्ध आपातकालीन सुविधाओं पर निर्भर करती है। इसके लिए विशेषज्ञ से व्यक्तिगत मूल्यांकन करवाना जरूरी है।

      निष्कर्ष

      नॉर्मल डिलीवरी के लिए क्या करना चाहिए, इसका सबसे सही जवाब है कि गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, संतुलित भोजन करें, डॉक्टर की अनुमति से नियमित शारीरिक गतिविधि करें और समय पर प्रसवपूर्व जांच करवाएं। प्रसव के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना और आपातकालीन संकेतों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

      कोई भी घरेलू नुस्खा, खास भोजन या एक्सरसाइज नॉर्मल डिलीवरी की गारंटी नहीं दे सकती। यदि सिजेरियन डिलीवरी मां या बच्चे के लिए अधिक सुरक्षित हो, तो डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।

      Khanna Hospital में गर्भावस्था और डिलीवरी से जुड़ी अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए योग्य गायनेकोलॉजिस्ट से परामर्श लें। नियमित जांच और सही चिकित्सकीय मार्गदर्शन आपको गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक बेहतर तैयारी करने में मदद कर सकते हैं।

      डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह व्यक्तिगत चिकित्सकीय जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अपनी गर्भावस्था और डिलीवरी से संबंधित निर्णय योग्य गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह से लें।

      Dr-Manish-Kumar-Gupta

      Dr. Vivek Khanna

      Khanna Hospital Established in 2009 by Dr S. C. Khanna and Dr. Vivek Khanna, a distinguished laparoscopic surgeons with over twenty-three years of clinical experience, Khanna Hospital was founded with a clear vision to deliver ethical, advanced, and compassionate healthcare to the community.

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